cgfilm.in राजिम कुंभ कल्प के 11वें दिन लोककला मंच पर रिंकू एवं आस्था भट्ट की शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को देर रात तक बांधे रखा। कार्यक्रम की शुरुआत भक्तिमय गीत शिवनाथ तेरी महिमा जब तीन लोक गाए” से हुई। इसके बाद छत्तीसगढ़ी गीत “ मै होगेव दिवानी रे”, “तैं का मोहनी खवाय रे”, “बही बना दिए रे बुंदेला पगली बना दिए ना”, “देख के संगी मोला का हो जाथे रे” जैसे गीतों से मनोरंजन का तड़का लगाया।
1965 की पहली छत्तीसगढ़ी फिल्म “कहीं देबे संदेश” के अमर गीत “सुन-सुन मोर मया पीरा के संगवारी रे” की प्रस्तुति ने पुरानी यादें ताजा कर दीं। दर्शकों को ऐसा आभास हुआ मानो आकाशवाणी रायपुर से यह गीत प्रसारित हो रहा हो। वहीं “मोर मृगनयनी” और जसगीत “ऐ चंडी दाई वो बिरकोनी वाली” ने वातावरण को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
कार्यक्रम के अगले चरण में किशोर साहू और अनुप श्रीवास्तव के लाफ्टर शो ने समां बांध दिया। दोनों कलाकारों ने पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी, पूर्व मंत्री बृजमोहन अग्रवाल समेत कई राजनेताओं, विभिन्न जीव-जंतुओं और प्रसिद्ध हस्तियों की आवाजों की सटीक नकल कर दर्शकों को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया। कुछ क्षणों तक दर्शक भ्रमित हो उठे कि मानो वास्तविक हस्तियां मंच पर उपस्थित हों।
कविता वासनिक की सुरमयी प्रस्तुति ने बांधा समां
मंच पर अंतिम प्रस्तुति के रूप में छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध रेडियो एवं छत्तीसगढ़ी गायिका कविता वासनिक ने अपनी सुरमयी आवाज से ऐसा समां बांधा कि पूरा पंडाल देर रात तक तालियों से गूंजता रहा। कार्यक्रम की शुरुआत उन्होंने देवी गीत “नवदुर्गा ते कहाय वो” से की। गीत की प्रस्तुति देख दर्शक उत्साह से भर उठे। कविता वासनिक ने गीतों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की प्राचीन ‘नाचा’ विधा का भी सजीव परिचय कराया।
इससे युवा पीढ़ी को अपनी लोक परंपराओं की गहराई और गौरव का एहसास हुआ। इसके बाद अनुराग धारा के कलाकारों ने “मोला दिखाय दे न भोला” गीत की प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरीं। “ददरिया बिन पानी के मछरी” ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं “मनभावन हरेली तिहार आ गे” गीत के माध्यम से फुगड़ी, खो-खो और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों की झलक दिखाकर दर्शकों को बचपन की यादों में लौटा दिया। लक्ष्मण मस्तुरिया की अमर रचना “बखरी के तुमा नार बरोबर मन झूमे ” गूंजते ही पुरानी यादें ताजा हो उठीं।
आदिवासी गीत “महुआ झरे रे” पर मंच के बाहर भी लोग थिरकते नजर आए। “चौरा म गोंदा” और “पता ले जा रे गाड़ी वाला” जैसे गीतों ने माहौल को चरम पर पहुंचा दिया। कार्यक्रम के अंत में कलाकारों का सम्मान एसडीएम, तहसीलदार व जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर किया। मंच संचालन निरंजन साहू, मनोज सेन, दुर्गेश तिवारी एवं किशोर निर्मलकर ने किया।
